आज सोचा हमने
संभालें उन ज़ख्मों को
जिनपर मली गयी थी वक़्त की दवा
लेकिन वो ज़ख्म अब
निशाँ के हवाले हो चुके थे
आज सोचा हमने
फाड़ दें उन पन्नों को
जिनमें समेटे थे गुज़रे कुछ पल
लेकिन तबाह होने से पहले
अफ़साने आँखों में बयाँ हो चुके थे
आज सोचा हमने
अश्कों से धो डालें
यादों की हर तस्वीर को
लेकिन छलकने से पहले ही
अश्क संग हवा के उड़ चुके थे
आज सोचा हमने
समझायें अपनी आँखों को
वो देखें नया कोई सपना
लेकिन संवरने से पहले ही
सपने फिर बिख़र चुके थे
आज सोचा हमने
लिखी जाए एक ग़ज़ल
एक और तराना
लेकिन कागज़ पर उमड़ने से पहले ही
जज़्बात बेज़ुबां हो चुके थे
आज सोचा हमने
दोबारा करें शुरू ये ज़िन्दगी
इस मरतबा खुद के लिए
लेकिन शुरुआत करने से पहले ही
हम फिर किसी और के हो चुके थे
संभालें उन ज़ख्मों को
जिनपर मली गयी थी वक़्त की दवा
लेकिन वो ज़ख्म अब
निशाँ के हवाले हो चुके थे
आज सोचा हमने
फाड़ दें उन पन्नों को
जिनमें समेटे थे गुज़रे कुछ पल
लेकिन तबाह होने से पहले
अफ़साने आँखों में बयाँ हो चुके थे
आज सोचा हमने
अश्कों से धो डालें
यादों की हर तस्वीर को
लेकिन छलकने से पहले ही
अश्क संग हवा के उड़ चुके थे
आज सोचा हमने
समझायें अपनी आँखों को
वो देखें नया कोई सपना
लेकिन संवरने से पहले ही
सपने फिर बिख़र चुके थे
आज सोचा हमने
लिखी जाए एक ग़ज़ल
एक और तराना
लेकिन कागज़ पर उमड़ने से पहले ही
जज़्बात बेज़ुबां हो चुके थे
आज सोचा हमने
दोबारा करें शुरू ये ज़िन्दगी
इस मरतबा खुद के लिए
लेकिन शुरुआत करने से पहले ही
हम फिर किसी और के हो चुके थे